- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: रजत चंद्र और गुलाब माला से सजे बाबा, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट!
- धुलेंडी के साथ उज्जैन में शुरू हुआ गणगौर पर्व, महिलाएं 16 दिनों तक करेंगी पूजा; राजस्थान से मंगवाई जाती हैं ड्रेस
- चिंतामन गणेश मंदिर में दूसरी जत्रा, हजारों श्रद्धालु पहुंचे दर्शन के लिए; किसानों ने नई फसल भगवान को अर्पित की
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: भांग-चंदन और सिंदूर से सजा बाबा का दिव्य रूप, मोगरा-गुलाब के पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार
- उज्जैन में शीतला माता पूजन का उत्साह, मंदिरों में उमड़ी महिलाओं की भीड़; एक दिन पहले तैयार किया जाता है भोजन
पितरों की आत्मशांति हेतु पिंडदान व तर्पण
श्राद्ध पक्ष की बड़ी चौदस के अवसर पर देशभर से आए हजारों लोगों ने सिद्धवट पर अपने पितरों की आत्मशांति के लिए पिंडदान व तर्पण किया। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सिद्धवट पर दूध अर्पित किया। हालांकि प्रशासन द्वारा मंदिर में वटवृक्ष पर दूध चढ़ाने के लिए परिसर में पात्र की व्यवस्था की है। सुबह से ही भैरवगढ़ स्थित सिद्धवट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। श्राद्ध पक्ष की बड़ी चौदस पर पितरों की आत्मशांति के लिए पिंडदान एवं तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन देशभर से लोग सिद्धवट पहुंचते है। इसके अलावा रामघाट एवं गयाकोटा पर भी पिंडदान व तर्पण करवाया जाता है।
वटवृक्ष पर दूध चढ़ाने से वटवृक्ष सडऩे लगा था। इसकी जानकारी लगने पर तात्कालीन कलेक्टर कवीन्द्र कियावत ने निर्देश दिए थे कि आगे से वटवृक्ष पर दूध नहीं चढ़ाया जाए और इसके लिए अलग से एक पात्र की व्यवस्था की जाए। जहां पर श्रद्धालुजन दूध अर्पित कर सके। प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णय के बाद अब श्रद्धालुजन पात्र में दूध चढ़ाते हैं जो कि सिद्धवट के चरणों में होते हुए शिप्रा नदी में जाकर मिलता है।